Spacer
 
Spacer
  Business.gov.in Indian Business Portal
An Initiative of India.gov.in
 
 
तीव्र मीनू

भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था
भारतीय अर्थव्यवस्था वर्ष 1991 से आर्थिक सूचकांक
भारतीय अर्थव्यवस्था भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की वर्तमान स्थिति
भारतीय अर्थव्यवस्था अध्‍ययन/सर्वेक्षण/प्रतिवेदन
   
 
भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था
 
भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था क्रय शक्ति समानता के आधार पर दुनिया में चौथी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था है। यह विशाल जन शक्ति आधार, विविध प्राकृतिक संसाधनों और सशक्‍त बृहत अर्थव्‍यवस्‍था के मूलभूत तत्‍वों के कारण व्‍यवसाय और निवेश के अवसरों के सबसे अधिक आकर्षक गंतव्‍यों में से एक है। वर्ष 1991 में आरंभ की गई आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया से सम्‍पूर्ण अर्थव्‍यवस्‍था में फैले नीतिगत ढांचे के उदारीकरण के माध्‍यम से एक निवेशक अनुकूल परिवेश मिलता रहा है।

दुनिया के बाजार में भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की वृद्धि और निष्‍पादन को विभिन्‍न आर्थिक पैरामीटरों के जरिए प्रदान की गई सांख्यिकीय सूचना के संदर्भ में बताया गया है। उदाहरण के लिए सकल राष्‍ट्रीय उत्‍पाद (जीएनपी), सकल घरेलू उत्‍पाद (जीडीपी), निवल राष्‍ट्रीय उत्‍पाद (एनएनपी), प्रतिव्‍यक्ति आय, सकल घरेलू पूंजी निर्माण (जीडीसीएफ) आदि अर्थव्‍यवस्‍था के राष्‍ट्रीय आय क्षेत्र से संबंधित विभिन्‍न सूचक हैं। ये मानवी इच्‍छाओं की संतुष्टि के लिए इसकी उत्‍पादकता सहित अर्थव्‍यवस्‍था का एक व्‍यापक परिदृश्‍य प्रदान करते हैं।

औद्योगिक क्षेत्र में औद्योगिक उत्‍पादन का सूचकांक अर्थव्‍यवस्‍था में औद्योगिक गतिविधि के सामान्‍य स्‍तर को मापने का एक अकेला प्रतिनिधि आंकड़ा है। यह औद्योगिक उत्‍पादन का परम स्‍तर और प्रतिशत वृद्धि मापता है।

मुद्रा आपूर्ति के उपायों में से चार प्रमुख मौद्रिक योग, जो मौद्रिक क्षेत्र की स्थिति दर्शाते हैं, इस प्रकार हैं : (i) एम1 (संकीर्ण धन) = जनता के पास मौजूद मुद्रा + जनता की मांग पर जमा; (ii) एम2 = एम1 + डाकखाने में जमा राशि; (iii) एम3 (स्‍थूल धन) = एम1 + जनता द्वारा बैंकों में सावधि जमा और (iv) एम4 = एम3 + डाकखाने में कुल जमा।

देश में मूल्‍य की गति को थोक मूल्‍य सूचकांक (डब्‍ल्‍यूपीआई) तथा उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक (सीपीआई) द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। डब्‍ल्‍यूपीआई को थोक बाजार में खरीदी – बेची गई वस्‍तुओं के औसत मूल्‍य स्तर में बदलाव को मापने में किया जाता है। जबकि उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक में उपभोक्‍ताओं के विभिन्‍न वर्गों में खुदरा मूल्‍य गति को विचार में लिया जाता है। अर्थव्‍यवस्‍था में विभिन्‍न सामाजिक-आर्थिक समूहों का शामिल करते हुए चार उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक हैं। ये चार मूल्‍य सूचकांक हैं – औद्योगिक कामगारों के लिए उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक (सीपीआई-आईडब्‍ल्‍यू); कृषि श्रमिकों के लिए उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक (सीपीआई-एएल); ग्रामीण श्रमिक के लिए उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक (सीपीआई-आरएल); तथा शहरी नॉन मैनुअल कर्मचारियों के लिए उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक (सीपीआई-यूएनएमई)।

ऐसे सभी आर्थिक सूचकांक न केवल अर्थव्‍यवस्‍था वर्तमान निष्‍पादन का मापन/विश्‍लेषण करते हैं बल्कि भावी वृद्धि संभावनाओं के अनुमान और पूर्वानुमान में भी सहायता देते है।

^ ऊपर

 
Government of India
spacer
 
 
Business Business Business
 
  खोजें
 
Business Business Business
 
Business Business Business
 
मैं कैसे करूँ
Business कम्‍पनी पंजीकरण करूं
Business नियोक्‍ता के रूप में पंजीकरण करें
Business केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) में शिकायत भरें
Business टैन कार्ड के लिए आवेदन करें
Business आयकर विवरणी भरें
 
Business Business Business
 
Business Business Business
 
  हमें सुधार करने में सहायता दें
Business.gov.in
हमें बताएं कि आप और क्‍या देखना चाहते हैं।
 
Business Business Business
Business
Business Business Business
 
निविदाएं
नवीनतम शासकीय निविदाओं को देखें और पहुंचें...
 
Business Business Business
Business
Business Business Business
 
 
पेटेंट के बारे में जानकारी
Business
कॉपीराइट
Business
पेटेंट प्रपत्र
Business
अभिकल्पन हेतु प्रपत्र
 
 
Business Business Business
 
 
 
Spacer
Spacer
Business.gov.in  
 
Spacer
Spacer