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कृषि

कृषि भारत के लगभग दो तिहाई कार्यबल के लिए आजीविका का साधन है। इसके फलस्‍वरूप यह अर्थव्‍यवस्‍था के सबसे अधिक महत्‍वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है। आजादी के समय कृषि क्षेत्र से प्राप्‍त राजस्‍व आज के राजस्‍व के अपेक्षा काफी कम था। राजस्‍व में इस वृद्धि का मुख्‍य कारण कृषि उत्‍पादन में वृद्धि है जो हरित क्रांति के कारण हुआ है।

सत्तर के दशक की हरित क्रांति खेती, सिंचाई सुविधाओं का विस्‍तार करने, उन्‍नत गुणवत्ता वाली बीजों को प्रदान करने, खेती की तकनीकों एवं पौध संरक्षण में सुधार करने के अंतर्गत अतिरिक्‍त क्षेत्रों को लाने के लिए उत्तरदायी थी।

कई वर्षों से कृषि केंद्र तथा राज्‍य सरकारों की शीर्ष प्राथमिकताओं में से एक प्राथमिकता के रूप में उभरी है। इस बात को ध्‍यान में रखते हुए कृषि उत्‍पादकता तथा लाखों किसानों जो देश को भोजन प्रदान करने के लिए कार्य करते हैं, के जीवन स्‍तर को सुधारने के लिए विभिन्‍न योजनायें शुरू की गई हैं।

वर्ष 2000 में सरकार ने प्रथम राष्‍ट्रीय कृषि नीति (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) की घोषणा की। इस नीति का मुख्‍य उद्देश्‍य निम्‍नलिखित है:

  • भारतीय कृषि की अनप्रयुक्‍त व्‍यापक विकास संभावनाओं को कार्यान्वित करना
  • कृषि के त्‍वरित विकास को सहायता प्रदान करने के लिए ग्रामीण अवसंरचना को मजबूत बनाना
  • मूल्‍य अभिवृद्धि को प्रोत्‍साहन देना, कृषि कारोबार के विकास को तेज करना
  • ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजित करना
  • सभी किसानों के लिए उचित जीवन स्‍तर प्राप्‍त करना
  • शहरी क्षेत्रों में विस्‍थापना को हतोत्‍साहित करना तथा आर्थिक उदारीकरण तथा वैश्‍वीकरण से उदभूत होने वाली चुनौतियों का सामना करना

इस खंड में हम मृ‍दा, कृषि उपस्‍कर, ऋणों तथा विभिन्‍न फसलों के संव्‍यवहार जैसे विषयों पर महत्‍वपूर्ण सूचना प्रदान करते हैं। कृ‍षक तथा अन्‍य नागरिक जो कृषि का कार्य करने के इच्‍छुक हैं, को यह खंड अत्‍यंत ही मूल्‍यवान लगेगा।

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भारत की जनगणना 2011

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: 08-02-2011