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आवास

भारत उस वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्‍सा है जो अधिकाधिक शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है, जिसके अनुसार विश्‍व की जनसंख्‍या का आधे से अधिक हिस्‍सा शहरों और नगरों में रह रहा है। 2001 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्‍या 1,027 मिलियन है जिसमें से 27.8 प्रतिशत नागरिक शहरी क्षेत्रों में रहते हैं। 1991 और 2001 के बीच दस वर्षों की अवधि में देश में शहरी जनसंख्‍या के अनुपात में 2.1 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।

यह उल्‍लेखनीय है कि सकल घरेलू उत्‍पाद (जीडीपी) में शहरी क्षेत्र का योगदान इस समय 50-60 प्रतिशत के बीच होने का अनुमान लगाया गया है। इस संदर्भ में, शहरी क्षेत्रों की उत्‍पादकता में वृद्धि करना शहरी विकास मंत्रालय की नीतिगत घोषणाओं में केन्‍द्रीय महत्‍व रखता है। आर्थिक और सामाजिक विकास करने में, रोज़गार सृजित करने तथा किफ़ायती स्‍तर पर सम्‍पदा सृजित करने की शहरों में अपार क्षमता होती है। किसी भी देश के आर्थिक विकास के लिए उच्‍च शहरी उत्‍पादकता के माध्‍यम से इसे बनाए रखना तथा बढ़ाया जाना चाहिए। राष्‍ट्रीय आर्थिक विकास और गरीबी उन्‍मूलन के प्रयास अधिकाधिक इन शहरों और नगरों के विकासोन्‍मुखी तथा उत्‍पादनशील बनने के लिए विश्‍व-स्‍तरीय शहरी व्‍यवस्‍था बनाना आवश्‍यक है जो आगे चलकर शहरी अवसंरचना के निर्माण तथा वित्त पोषण में कार्यदक्षता एवं साम्‍यता हासिल करने पर निर्भर होगी।

वर्ष 1950 के बाद भारत सरकार ने दस पंचवर्षीय योजनाएं बनाई जिनका उद्देश्‍य आवास और शहरी विकास था जिनके परिणामस्‍वरूप नेहरू रोज़गार योजना (एनआईवाई) के शहरी निर्धनता-उन्‍मूलन कार्यक्रम की शुरूआत हुई। इन योजनाओं में संस्‍था निर्माण तथा सरकारी कर्मचारियों एवं कमज़ोर वर्गों के लिए मकानों के निर्माण पर ज़ोर दिया गया। सभी कारीगरों को शामिल करने के लिए औद्योगिक आवास योजना को व्‍यापक बनाया गया। ''ग्‍लोबल शेल्‍टर स्‍ट्रेटजी (जीएसएस) की अनुवर्ती कार्रवाई के रूप में, 1988 में राष्‍ट्रीय आवास नीति की घोषणा की गई जिसका दीर्घकालिक उद्देश्‍य आवासों की कमी की समस्‍याओं को दूर करना, अपर्याप्‍त आवास व्‍यवस्‍था की आवासीय स्थितियों को सुधारना तथा सबके लिए बुनियादी सेवाओं एवं सुविधाओं का एक न्‍यूनतम स्‍तर मुहैया कराना था। सरकार की भूमिका में निर्धनता एवं कमज़ोर वर्गों के लिए प्रदाता के रूप में, और बाधाओं को हटाकर एवं भूमि तथा सेवाओं की अधिक आपूर्ति करा कर अन्‍य आय वर्गों एवं नि‍जी क्षेत्र के लिए सुविधाकर्ता के रूप में परिकल्‍पना की गई।

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भारत की जनगणना 2011

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल , द्वारा समीक्षित: 24-05-2011