विज्ञान और प्रौद्योगिकी

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विज्ञान और प्रौद्योगिकी

विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की प्राचीनकाल की उपलब्धियों से लेकर इस शताब्दी में प्राप्त महान सफलताओं की एक लंबी और अनूठी परंपरा रही है। स्वतंत्रता पूर्व के 50 वर्षों में ज्यादातर काम विशुद्ध अनुसंधान के क्षेत्र में हुए। स्वतंत्रता प्राप्ति के समय हमारा वैज्ञानिक व प्रौद्योगिकी ढांचा न तो विकसित देशों जैसा मजबूत था और न ही संगठित। इसके फलस्वरूप हम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अन्य देशों में उपलब्ध हुनर और विशेषज्ञता पर आश्रित थे। पिछले चार दशकों के दौरान राष्ट्र की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक आधारभूत ढांचा बना है व सामर्थ्य उत्पन्न कर ली गई है जिससे अन्य देशों पर भारत की निर्भरता घटी है। वस्तुओं, सेवाओं और उत्पादों के लिए व्यापक पैमाने पर लघु उद्योग से लेकर अत्याधुनिक परिष्कृत उद्योगों तक की स्थापना की जा चुकी है। मूलभूत और अनुप्रयुक्त विज्ञान के क्षेत्र की नवीनतम जानकारी से लैस अनुभवी विशेषज्ञों का समूह अब उपलब्ध है जो प्रौद्योगिकीयों में से विकल्प चुन सकता है, नई प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर सकता है और देश के भावी विकास का ढांचा तैयार कर सकता है।



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स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: 24-05-2011