नागरिक
यह पृष्‍ठ अंग्रेजी में (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

जैव नियंत्रण प्रयोगशाला

जैव नियंत्रण प्रयोगशालाओं का मुख्‍य उद्देश्‍य रासायनिक कीटनाशियों का प्रयोग करने के बजाए प्राकृतिक परभक्षियों के प्रयोग के जरिए पीड़क जंतुओं को नियंत्रित करना है। इस विधि को एकीकृत कीट प्रबंधन या आईपीएम भी कहा जाता हैं। एकीकृ‍त कीट प्रबंधन एक प्रणाली दृष्टिकोण (उपाय) है जिसमें कृषि (संवर्धन) पद्धतियों, फसल पालन, प्रतिरोधक किस्‍मों, जीवविज्ञानी तथा रासायनिक नियंत्रण कार्यनितियों का प्रयोग शामिल है ताकि फसल नाशी कीटों से छुटकारा पाया जा सके।

यह विधि दो प्रकार से उपयोगी है। प्रथमत: पौधों के संरक्षण की लागत कम हो जाती है क्‍योंकि उन मंहगे रासायनिक कीटनाशियों को केवल लघु मात्राओं में ही खरीदने की आवश्‍यकता होती है। दूसरे, जहरीले कीटनाशियों के प्रयोग द्वारा होने वाला पर्यावरणीय प्रदूषण काफी अधिक सीमा तक कम हो जाता हैं।

राष्‍ट्रीय एकीकृत कीट प्रबंधन केंद्र (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) (एनसीआईपीएम) देश के विभिन्‍न कृषि-पारिस्थितिकी मंडलों में पौध संरक्षण आवश्‍यकताओं के अनुसंधान के लिए उत्तरदायी हैं। यह भारत में उगाई जाने वाली मुख्‍य फसलों जैसे चावल, कपास तथा दालों के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन का संवर्धन करता है। एनसीआईपीएम मुख्‍य कीटों (‍नाशक जीवों) के लिए चेतावनी प्रणालियों का निर्माण भी करता है, भौगोलिक कीट वितरण मानचित्र तैयार करता है तथा आंकडाधार का विकास करता हैं।

राष्‍ट्रीय एकीकृ‍त कीट प्रबंधन केंद्र की एक अन्‍य विशेषता इसकी नैदानिक प्रयोगशालाएं हैं। ये प्रयोगशालाएं जीव विज्ञानी नियंत्रण अभिकर्ताओं के लिए बायोमास उत्‍पादक प्रौद्योगिकियों का सृजन करने में लगी हुई हैं। प्रत्‍येक प्रयोगशाला परपोषी कीटों जैसे कोरसिरा सीफालेनिका तथा हेली कोवेरपपा प्राकृतिक परभक्षी जैसे क्रिसोजर्ला कारनिया तथा कीट रोगजनक जैसे एचएएनपीवी को संवर्धित करने के लिए सुसज्जित हैं। जैव नियंत्रण प्रयोगशालाओं में सृजित ऐसे परपोषी कृषकों को निम्‍न दरों पर दिए जाते है ता‍कि वे बेहतर फसल उत्‍पादन तकनीकों का लाभ उठाने में समर्थ हो सकें।

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: 21-02-2011