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कृषि विस्‍तार कार्यक्रम

नई प्रौद्योगिकियों के विषय में सूचना का प्रचार करना महत्‍वपूर्ण है ताकि कृषक अद्यतन कृषि विकासों का उपयोग करने में समर्थ हो सके। अनुसंधान खोज और कृ‍षकों की अवश्‍यकताओं के बीच भी अंतर है। प्रौद्योगिकी के सफल होने के लिए यह महत्‍वपूर्ण है कि यह अंत प्रयोक्‍ता के‍ लिए उपयोगी प्रयोजन का कार्य करें। कृ‍षकों और कृषि अनुसंधान वैज्ञानिकों के बीच अंतर को पाटने वाली संस्‍था कृषि विस्‍तार सेवा है। यह सेवा राज्‍य में कृषि अनुसंधान प्रणाली के माध्‍यम से कार्य करती हैं।

कृषि विस्‍तार सेवा या ए ई एस का मुख्‍य उद्देश्‍य कृषकों को अद्यतन तकनीकियों को प्रदान करना है। इसके अतिरिक्‍त ए ई एस का संकेंद्रण फसल तकनीक के बारे में कृषकों का ज्ञान वर्धन करना है और उन्‍हें उत्‍पादकता बढ़ाने में सहायता करना है। यह प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों, फार्म का दौरा, किसान मेला, किसान क्‍लब, सलाहकार पत्रिकाओं आदि के माध्‍यम से किया जाता हैं।

राष्‍ट्रीय कृषि विस्‍तार प्रबंधन संस्‍थान (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) शीर्ष राष्‍ट्रीय संस्‍थान है जिसकी स्‍थापना कृषि मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन की गई है। यह राज्‍य सरकार भारत सरकार और अन्‍य सरकारी क्षेत्र के संगठनों को उनके कृषि विस्‍तार के प्रभावी प्रबंधन और अन्‍य प्रबंधन प्रणाली में सहायता करता हैं।

  • आंध्र प्रदेश (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं): कृषि विस्‍तार को सुदृढ़ करने और किसानों को प्रौद्योगिकी अंतरण करने के लिए प्रत्‍येक गांव में कृषक क्‍लब का गठन किया जा रहा है। इन क्‍लबों में अभिनव परिवर्तन कृषक प्रगतिशील कृषक और कृ‍षक हित समूह शामिल होते हैं। प्रत्‍येक क्‍लब का एक नवपरिवर्तन कृषक संयोजक या सम्‍पर्क व्‍यक्ति के रूप में कार्य करता है। ये कृषक समूह सकेंद्रित कृषि प्रचालन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए एक साथ मिलकर कार्य करते हैं जैसाकि कीट नियंत्रण अभियान का आयोजन करना। राज्‍य कृषि विभाग ने विस्‍तार कार्मिकों के प्रशिक्षण के लिए विभिन्‍न केंद्र स्‍थापित किया हैं। ये केंद्र निम्‍नानुसार है:
    1. राज्‍य कृषि प्रबंधन और विस्‍तार प्रशिक्षण संस्‍थान (समिति) हैदराबाद।
    2. मृदा संरक्षण प्रशिक्षण केंद्र, अनन्‍तपुर
    3. सेवारत प्रशिक्षण केंद्र।
  • असम (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं): कृषि विस्‍तार कार्यक्रम अधिकांशत चाय की खेती के लिए किसानों को प्रौद्योगिकी अंतरित करने के लिए संचालित किए जाते है जो कि राज्‍य में कृषि योग्‍य भूमि के सबसे बड़े क्षेत्र में की जाती है। कृषक प्रशिक्षण केंद्र नई खेती की नई तकनीकी में अति आवश्‍यक प्रशिक्षण शामिल करते हैं।
  • चंडीगढ़ (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं): कृषि विभाग विस्‍तार और कृषक प्रशिक्षण अध्‍ययन दौरा संचालित करता है। इस योजना की शुरूआत का लक्ष्‍य किसानों का उन्‍नत कृषि तकनीक से अवगत कराना है। योजना के अनुसार किसानों को पंजाब कृषि विश्‍वविद्यालय लुधियाना तथा दूसरे सुप्रसिद्ध कृषि संस्‍थाओं का दौरा कराया जाता है ताकि वे नई कृषि तकनीकियों को स्‍वयं देख सकें।
  • दादर और नगर हवेली (-1 MB) (पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है) : सिलवासा में एक कृषि कृषक प्रशिक्षण केंद्र है वह किसानों के लिए प्रशिक्षण और विस्‍तार कामगारों के लिए प्रशिक्षण चलाता है। प्रशिक्षण प्राप्‍त करने वाले किसानों को प्रशिक्षण केंद्र में तीन दिन के लिए मुफ्त में रहने और ठहरने की सुविधा दी जाती हैं।
  • गुजरात (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं): कृषि विस्‍तार कार्यक्रम कृषकों के लिए नई प्रौद्योगिकी शामिल करता है ताकि चावल, गेहूं ज्‍वार, बाजरा, मक्‍का, तुअर चना मूंगफली, कपास और तम्‍बाकू की खेती करने के लिए किसानों को सहायता मिले।
  • हरियाणा (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं): राज्‍य में कृषि विस्‍तार सेवा के उद्देश्‍य हैं :
    1. किसानों को अद्यतन तकनीकी ज्ञान देना।
    2. उनकी जानकारी बढ़ाना और व्‍यवसाय को अधिक उत्‍पादक बनाना।
    3. कृषि में समस्‍याओं और अड़चनों के संबंध में विस्‍तार अधिकारियों/वैज्ञानिकों को किसानों से पुनर्निवेशन प्रदान करना।।
    4. विस्‍तार कार्यकर्ताओं की व्‍यावसायिक क्षमता का वर्धन करना।
    5. किसानों के बीच सकारात्‍मक प्रतिस्‍पर्धा का सृजन करना।
    6. किसानों विस्‍तार अधिकारियों और अनुसंधानकर्ताओं के बीच सम्‍पर्क सुदृढ़ करना।
  • झारखंड (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं): समेति एक स्‍वायतशासी राज्‍य स्‍तरीय संस्‍था है, जो विभिन्‍न प्रकार के विभागों के परियोजना क्रियान्‍वयन तथा कृषक समुदाय के लिए जिम्‍मेदार है तथा संक्षेप में समेति निम्‍नलिखित के लिए जिम्‍मेदार है:
    1. परियोजना आयोजना क्रियान्‍वयन और मूल्‍यांकन जैसे क्षेत्र में कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसियों (आत्‍मा) को आवश्‍यकता अधारित परामर्शी सेवा प्रदान करना।
    2. कृषि विस्‍तार सेवा की प्रभावोत्‍पादकता बढ़ाने के लिए मानव और सामग्री संसाधनों के लिए उपयुक्‍त प्रबंधन उपकरणों का विकास और संवर्धन करना।
    3. मध्‍यम और बुनियादी स्‍तर के विस्‍तार कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम की व्‍यवस्‍था करना।
    4. प्रशिक्षण कार्यक्रम के पुनर्निवेशन से परिणामस्‍वरूप प्रबंधन, संचार और भागीदारी प्रविधियां।
    5. कृषि विस्‍तार प्रबंधन, कृषि उत्‍पाद, विपणन, मानव संसाधन विकास संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी के संबंध में समस्‍याओं पर अध्‍ययन का संचालन करना।
  • कर्नाटक (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं): कृषि विभाग खरीफ पूर्व और रबी पूर्व कार्यक्रम आयोजना कार्यशालाओं का आयोजन करता है जिसमें विभाग के अधिकारी, क्षेत्रीय स्‍तर के कार्यकर्ता, कृषि विज्ञान वैज्ञानिक विश्‍वविद्यालय इसी तरह के विभागों के अधिकारी और संबंधित निवेश एजेंसियों के अधिकारी भाग लेते हैं। ये कार्यशालाएं विभिन्‍न क्षेत्रों में आयोजित किए जाते हैं, जो कृषि अबोहवा क्षेत्रों, मृदा के प्रकार, फसल और वर्षा के तरीकों पर निर्भर करते हैं।
  • लक्षद्वीप: केंद्रीय सरकार विस्‍तार कार्यकर्ता और जानकार कृषक, प्रशिक्षण तथा अन्य विस्‍तार सहायता सतत आधार पर संघ राज्‍य क्षेत्रों और गोवा तथा सिक्किम राज्‍यों को प्रदान करके कृषि विकास का संवर्धन करने के लिए एक योजना चालाती हैं।‍ योजना का मुख्‍य उद्देश्‍य है :
    1. प्रशिक्षण मूल संरचना को बनाए रखना।
    2. फार्म सूचना एककों को सुदृढ़ करना।
    3. विभाग और अधीनस्‍थ विभागों के विस्‍तार कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देना और फील्‍ड प्रदर्शन का आयोजन करना।
  • मध्‍य प्रदेश: कृषि विभाग के अधीन 19 कृषि विस्‍तार और प्रशिक्षण केंद्र कार्यरत हैं।
  • महाराष्‍ट्र: कृषि विस्‍तार योजनाओं में कपास, मोटे अनाज, दालों, उरद, मक्‍का और तिलहन के लिए विकास कार्यक्रम शामिल हैं। अनेकानेक कार्यक्रमों में जल प्रबंधन के लिए कृषकों के लिए नई प्रौद्योगिकी शामिल करते हैं। विशेष संकेंद्रण क्षेत्र हैं अनुसूचित जाति और जनजाति और कृषि में महिलाओं की भूमिका।
  • तमिलनाडु: कृषि विस्‍तार कार्यक्रम का संकेंद्रण धान, मूंगफली, चोलम, कम्‍बु, हरा चना, और काला चना पर है। कावेरी डेल्‍टा क्षेत्र में किसान फार्म प्रबंधन में विशेष रूप से नई तकनीकी लाते हैं।
  • उड़ीसा (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं): उड़ीसा कृषि और प्रौद्योगिकी विश्‍वविद्यालय कृषि प्रशिक्षण विभागों जैसे कृषि विज्ञान केंद्र, दूरस्‍थ शिक्षा कार्यक्रमों और खेत साहित्‍य के उत्‍पादन, उपयोग के लिए प्रौद्योगिकी अंतरण मोडल सृजित करने के लिए जिम्‍मेदार हैं।

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: 18-02-2011