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नशीली दवाइयों का व्‍यसन और दुरुपयोग

नशीली दवाइयों का व्‍यसन और पदार्थों का दुरुपयोग एक चिरकालिक आवर्ती रोग है जिसमें औषधियों का प्रयोग करने वाला विवश होकर किसी अवैध औषधि की खोज तथा प्रयोग में समय नष्‍ट करता है। इस प्रकार के व्‍यसन के अभिलक्षण मस्तिष्‍क में तंत्रिका रासायनिक और आणविक परिवर्तन हैं। व्‍यसनियों द्वारा प्रयुक्‍त कुछ सामान्‍य औषधियां हैं हीरोइन, कोकीन, लिसर्जिक एसिड डाइएथिलऐमाइड (एलएसडी), मैन्‍ड्रैक्‍स, बार्बिटयूरेट और विभिन्‍न ओपिएट। अनुमान है कि भारत में नशीली दवाइयों के लगभग तीस लाख व्‍यसनी हैं।

पारंपरिक रूप, से भारत में नशीली दवाइयों के व्‍यवसनियों को उस परिवार या सामाजिक समूह की जिम्‍मेदारी माना जाता है जिससे वे संबंधित हों। अधिकांश मामलों में, व्‍यसनियों का उपचार सामान्‍य स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के माध्‍यम से स्‍वैच्छिक आधार पर किया जाता है। अब राज्‍य स्‍तर के अस्‍पताल भी अपने मनश्चिकित्‍सा विभागों के माध्‍यम से दु:साध्‍य व्‍यसनियों के अंतरंग उपचार के लिए पुनर्वास की सुविधाएं उपलबध कराते हैं। राज्‍य चालित उपचार केंद्रों के अतिरिक्‍त, स्‍वैच्छिक संगठनों द्वारा चलाए जा रहे नशा छुड़वाने वाले केंद्रों का एक नेटवर्क है और देश के विभिन्‍न प्रदेशों में समुदाय आधारित उपचार कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।

इन कार्यक्रमों का मुख्‍य उद्देश्‍य यह है कि व्‍यसनियों के अपने परिवार तथा समुदाय के साथ संबं‍ध मज़बूत किए जाएं और उनकी पुनर्वास प्रक्रिया में समुदाय से सहयोग लिया जाए। गैर सरकारी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे नशा छुड़वाने वाले केंद्र व्‍यसनियों के इलाज के लिए कई प्रकार की मनश्चिकित्‍सा के साथ उपचार की विभिन्‍न प्रणालियों का प्रयोग करते हैं यथा ऐलोपैथी, होमियोपैथी, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्‍सा और योग।

औषध दुरूपयोग सूचना पुनर्वास और अनुसंधान केंद्र (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) (डीएआईआरआरसी) एक पंजीयित धर्मार्थ ट्रस्‍ट है जो व्‍यसनियों के पुनर्वास में लगा हुआ है। इसकी स्‍थापना 1982 में मुबंई नगर में हुई थी। यह केंद्र विविध प्रकार की पुनर्वास सेवाएं उपलब्‍ध कराता है यथा हीरोइन व्‍यसन उपचार, कोकीन व्‍यसन उपचार, सॉल्‍वेंट दुरुपयोग उपचार, निर्धा‍रित औषधियों के व्‍यसन के प्रति उपचार, मेथाडोन व्‍यसन उपचार और दुरुपयोग की अन्‍य सभी औषधियों के व्‍यसन के लिए उपचार। पुनर्वास केंद्र की अधिक जानकारी और चित्र (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

यदि औषधियों के व्‍यसनियों का पूरी तरह पुनर्वास करना है तो ज़रूरी है कि व्‍यसनियों के उपचार और सामाजिक एकीकरण के लिए स्‍थानीय समुदाय को शामिल किया जाएं। इस उपक्रम को आगे बढ़ाने के लिए स्‍वैच्छिक संगठनों के माध्‍यम से समुदाय स्‍तर पर नशा छुडवाने वाले अनेक शिविर (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। ये शिविर व्‍यसनियों को उन बस्तियों में परामर्श, उपचार और पुनर्वास की सुविधाएं उपलबध कराते हैं जहां वे रहते हैं। जागरुकता पैदा करना और चिकित्‍सीय समुदाय स्‍थापित करना अन्‍य अवधारणाएं जो व्‍यसनियों के पुनर्वास में मदद करती है। नशा छुडवाने वाले अनेक शिविर पर अधिक जानकारी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

विभिन्‍न प्रकार के व्‍यसनों के उपचार में स्‍वावलंबन तकनीकें काफी उपयोगी सिद्ध हुई हैं। ये तकनीकें उपलब्‍ध कराने वाला एक लो‍कप्रिय समूह नार्कोटिक्‍स ऐनॉनिमस (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) है। यह समूह निजी बैठकें आयोजित करता है जहां व्‍यसनी दूसरे व्‍यसनियों से सीखते हैं कि नशीली औषधियों से मुक्‍त कैसे रहा जाए और व्‍यसन से कैसे उबरा जाए। ये बैठकें बैंगलूर, मुंबई, नई दिल्‍ली तथा चेन्‍नई आदि नगरों में नियमित रूप से आयोजित की जाती हैं।

संप्रति, मंत्रालय 361 स्‍वैच्छिक संगठनों(बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) को समर्थन देता है जो देश के विभिन्‍न भागों में नशा छुड़वाने एवं पुनर्वास के 376 केंद्र (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) और 68 परमर्श एवं जागरूकता केंद्र (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) चला रहे हैं। जिन्‍हें दीर्घकालीन पुनर्वास की ज़रूरत होती है, उनके लिए सरकार अपने अस्‍पतालों तथा प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों में भी नशा छुड़वाने के 100 केंद्र (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) चला रही है।

राष्‍ट्रीय औषधि दुरूपयोग निवारण केंद्र (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) ने 8 गैर सरकारी संगठनों (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) की पहचान की है जिनके पास प्रादेशिक स्‍तरों पर प्रशिक्षण एवं जानकारी उपलब्‍ध कराने के लिए, कार्यक्रमों की निगरानी करने के लिए और औषधि दुरूपयोग निगरानी तंत्र (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) को क्रियान्वित करने के लिए सुदृढ़ तकनीकी क्षमताएं हैं। ये गैर सरकारी संगठन हैं गैलेक्‍सी क्‍लब (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं), कृ‍पा फाउंडेशन (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं), द कलाकत्ता सैमारिटन्‍स (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं), मिजोरम सोशल डिफेन्‍स एंड रीहैबिलिटेशन बोर्ड (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं), मुक्‍तांगन मित्र (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं), सोसाइटी फॉर प्रोमोशन ऑफ यूथ एंड मासिज (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं), टी टी रंगनाथन क्लिनिकल रिसर्च फाउंडेशन (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) और विवेकानंद एजुकेशन सोसाइटी (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं)

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल