मैं कैसे करूँ ?

मनरेगा के तहत नौकरी के लिए आवेदन करें

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) का उद्देशय एक वित्तीय वर्ष में सौ दिन के वेतन सहित रोजगार गारंटी के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आजीविका सुरक्षा बढ़ाना है। इस अधिनियम के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में घर के वयस्क सदस्य को स्वयंसेवक के तौर पर अकुशल कार्यों में लगाया जाता है।

मनरेगा (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए मूल वेतन की सुरक्षा पर ध्यान देता है एवं लोकतंत्र की परिवर्तनकारी सशक्तिकरण की प्रक्रिया को ग्रामीण अर्थव्यवस्था तक पहुंचाता है। जब अन्य रोजगार के विकल्प कम या अपर्याप्त हैं, तब यह रोजगार स्रोत प्रदान करके कमजोर वर्ग के लिए एक मजबूत सामाजिक सुरक्षा तंत्र प्रदान करता है।

इस प्रकार जो योजना बनाई गई है उसे विभिन्न राज्यों में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) के नाम से क्रियान्वित किया जाता है।

कार्य के लिए आवेदन:

  • आवेदन कैसे करें?
    आवेदन लिखित रूप में दिया जाना चाहिए और इसमें रोजगार कार्ड की पंजीकरण संख्या, जिस तारीख से रोजगार की आवश्यकता है और रोजगार के आवश्यक दिनों की संख्या को शामिल करना चाहिए। इस आवेदन में घर के उन वयस्क सदस्यों का नाम, जो अकुशल शारीरिक श्रम करने को तैयार हैं, भी शामिल करना चाहिए और उनकी उम्र, लिंग और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के स्तर का विवरण भी दर्ज करना चाहिए।
  • आवेदन कहां करें?
    कार्य के लिए आवेदन आमतौर पर ग्राम पंचायत को प्रस्तुत करना चाहिए। एक व्यक्ति व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर पंजीकरण के लिए मौखिक अनुरोध कर सकता है।
  • पंजीकरण का समय क्या है?
    स्थानीय ग्राम पंचायत अधिकारी को सादे कागज पर किसी भी कार्य दिवस के दौरान सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच पंजीकरण के लिए आवेदन किया जा सकता है। विस्थापित परिवारों को अधिक से अधिक अवसर प्रदान करने के उद्देशय से, ग्राम पंचायत कार्यालय में वर्ष भर में कार्य घंटों के दौरान पंजीकरण की सुविधा प्रदान की गई है।
  • लक्षित दर्शक कौन हैं?
    ग्रामीण घर जिनका वयस्क सदस्य स्वयंसेवक के तौर पर अकुशल शारीरिक श्रम करने को तैयार है।
  • इससे क्या लाभ है?
    योजना ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को एक वित्तीय वर्ष में सौ दिन के रोजगार की गांरटी प्रदान करती है।

आवेदनों का सत्यापन ग्राम पंचायतों के संबंध में स्थानीय निवास के बारे में होता है और घर को एक इकाई के रूप में माना जाता है। सत्यापन के तहत यह तथ्य पता लगाया जाता है कि आवेदक घर का वयस्क सदस्य है या नहीं। सत्यापन के बाद, ग्राम पंचायत पंजीकरण रजिस्टर में सभी विवरण दर्ज करती है। प्रत्येक पंजीकृत घर को एक अद्वितीय पंजीकरण संख्या प्रदान की जाती है।

रोजगार कार्ड:

  • ग्राम पंचायत प्रत्येक पंजीकृत परिवार को रोजगार कार्ड जारी करती है। यह एक महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज है, जो पारदर्शिता सुनिश्चित करने और धोखाधड़ी के खिलाफ सुरक्षा करने में मदद प्रदान करता है।
  • रोजगार कार्ड, पंजीकरण के लिए आवेदन करने के एक पखवाड़े के भीतर अर्थात सत्यापन के तुरंत बाद जारी किया जाता है।
  • आवेदन करने वाले वयस्क सदस्यों का फोटो रोजगार कार्ड के साथ संलग्न किया जाता है।
  • यदि एक तस्वीर का प्रावधान तत्काल संभव नहीं है, तो एक विशेष क्षेत्र में राज्य सरकार तस्वीर बाद में चिपकाए जाने (लेकिन एक महीने के भीतर) का आदेश जारी कर सकती है।
  • रोजगार कार्डों तथा उसके लिए खिंचवाए गए फोटोग्राफ की लागत कार्यक्रम की लागत का हिस्सा होगी।
  • रोजगार कार्ड की एक प्रति ग्राम पंचायत में रखी जाएगी।

रोजगार कार्ड में परिवर्तन:

रोजगार कार्ड की अवधि पांच साल की होगी। इस दौरान उसमें मौजूद सदस्यों के नाम कभी भी हटायें/जोड़े जा सकते हैं। अगर किसी परिवार में किसी वयस्क आवेदक की मृत्यु हो जाती है या कोई वयस्क सदस्य स्थायी रूप से कहीं ओर जाकर बस जाता है, तो इस बात की खबर संबंधित परिवार को फौरन पंचायत में देनी होगी। अगर आवेदक परिवार रोजगार कार्ड में किसी नए वयस्क सदस्य का नाम जुड़वाना चाहता है तो इसके लिए भी परिवार को अलग से आवेदन देना होगा।

प्रतिलिपी रोजगार कार्ड:

रोजगार कार्ड धारक मूल कार्ड के खो जाने या क्षतिग्रस्त हो जाने पर रोजगार कार्ड की नकल की मांग कर सकता है। इस आशय का आवेदन भी ग्राम पंचायत को किया जाएगा और उस पर भी वैसे ही कार्रवाई की जाएगी जिस तरह नए आवेदन पर कार्रवाई की जाएगी। इस बार एकमात्र फर्क यह होगा कि आवेदक से संबंधित जानकारियों की पुष्टि के लिए पंचायत के पास पहले से मौजूद रोजगार कार्ड की नकल प्रति का ही इस्तेमाल किया जाएगा।

शिकायत:

अगर किसी व्यक्ति को रोजगार कार्ड न जारी होने के सवाल पर शिकायत है तो वह इस मामले को कार्यक्रम अधिकारी की जानकारी में ला सकता है। अगर उसे कार्यक्रम अधिकारी से ही शिकायत है तो वह जिला कार्यक्रम समन्वयक या ब्लॉक अथवा जिला स्तर पर उत्तरदायी शिकायत निपटारा अधिकारी के पास उसकी शिकायत भेज सकता है। ऐसी सभी शिकायतें 15 दिनों के भीतर निपटाई जाएगीं।

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स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल