विज्ञान और प्रौद्योगिकी
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नाभिकीय ऊर्जा कार्यक्रम-द्वितीय चरण

फास्‍ट रिएक्‍टर कार्यक्रम

परमाणु ऊर्जा उत्‍पादन के दूसरे चरण में फास्‍ट ब्रीडर रिएक्‍टरों की स्‍थापना और उनके साथ पुनर्प्रसंस्‍करण संयंत्रों और प्‍लूटोनियम-आधारित ईंधन संविचरण केंद्रों की स्‍थापना का प्रस्‍ताव है। ये फास्‍ट ब्रीडर प्रणालियां जितना ईंधन इस्‍तेमाल करती हैं, उससे ज्‍यादा का उत्‍पादन करती हैं। इनमें ईंधन का इस्‍तेमाल पी.एच.डब्‍लू. रिएक्‍टरों से लगभग साठ गुना ज्‍यादा तक हो सकता है।

इस विभाग के इन्दिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र ने अक्तू बर 1985 में कलपक्कईम, तमिलनाडु में फास्टा ब्रीडर परीक्षण रियेक्ट र की स्थाबपना के साथ अपना ब्रीडर कार्यक्रम शुरू किया। स्वमदेश में ही विकसित मिश्रित यूरेनियम-प्लू‍टोनियम कार्बाइड ईंधन के उपयोग से इस केंद्र ने अपना प्रौद्योगिकी लक्ष्य प्राप्ते कर लिया है।

इस रिएक्‍टर को 17.4 मेगावाट के विद्युत स्‍तर तक चलाया गया तथा इसके टर्बो जेनरेटर को ग्रिड से जोडने पर 18 लाख यूनिट बिजली प्राप्‍त हुई। इस ईंधन का बर्न अप 1,54,000 मेगावाट दिवस प्रति टन (एमडब्‍ल्‍यूडी/टी) तक पहुंचा जो कि मूलरूप से डिजाइन किए गए मानक का चार गुना अधिक है।

इस रिएक्ट र से मिले अनुभव से अक्तूाबर 2003 में स्था‍पित भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम (भवानी) 500 मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट2 ब्रीडर रिएक्ट र का निर्माण कर रही है। यह एक पूल प्रकार का रिएक्टटर है जिसमें यूरेनियम और प्लू0टोनियम के मिश्र ऑक्सााइड का इस्तेयमाल ईंधन के रूप में किया जाता है। इसकी संरचना और तकनी‍क आई.जी.सी.ए.आर में विकसित की गई हैं। पी.एफ.बी.आर. के सितंबर 2010 में उत्पारदन शुरू कर देने की उम्मीवद है। एफ.बी.आर. कार्यक्रम का उद्देश्यब उपलब्ध यूरेनियम धातु संसाधनों के जरिए भारत की विद्युत क्षमता सौ गुनी तक बढ़ाना है।

आईजीसीएआर के अनुसंधान और विकास कार्य में प्रमुखता प्राथमिक रूप से पीएफबीआर के डिजाइन वैधीकरण को दी जाती है तत्पंश्चाात लागत घटाने के लिए भविष्यम के एफबीआर हेतु डिजाइन आप्टीरमाइजेशन का कार्य किया जाता है।

फास्टन रिएक्टटर ईंधन निर्माण

विश्वं में पहली बार उच्चक प्लूाटोनियम मात्रा युक्त् मार्क-1 मिश्रित कार्बाइड ईंधन कोर का वि‍कास किया गया है। मार्क II कोर का निर्माण कार्य ट्रांबे में प्रगति पर है। एफबीटीआर में विखंडन के लिए प्रायोगिक पीएफबीआर सब-असेंबली हेतु कई पीएफबीआरएमओएक्स् ईधन तत्वों का निर्माण बार्क द्वारा किया जा रहा है।

फास्टं रिएक्टिर ईंधन पुनर्प्रसंस्कहरण

एफ.बी. टी.आर ईंधन के पुनर्प्रसंस्क‍रण के लिए लेड मिनि सेल, जिसे अब कॉम्पैकक्टी रीप्रोसे‍सिंग फेसिलिटी फॉर एडवांस फ्यूल इन लेड सेल (कोरल) कहा जाता है, कलपक्करम में स्थारपित किया गया है। इसका उद्देश्यू फास्टस रिएक्ट)र पुनर्प्रसंस्क,रण प्रक्रिया को स्था पित करना है। फास्ट ब्रीडरों से ईंधन के पुनर्प्रसंस्कगरण के लिए आईजीसीएआर फास्ट् रिएक्टतर फ्यूल रिप्रोसेसिंग संयंत्र लगा रहा है। खर्च हुए ईंधन के क्षेत्र से यूरेनियम और प्लूएटोनियम प्राप्तत करने तथा रेडियोक्रिय विखंडन उत्पाखदों के अलग करने के लिए एक व्या पक प्रक्रिया विकसित की गई है।

फास्ट ब्रीडर प्रौद्योगिकी विकास

प्रौद्योगिकी विकास कार्यक्रम के अंतर्गत आईजीसीएआर इंजीनियरिंग से जुड़े अनुसंधान और विकास कार्य कर रहा है। इनमें तापीय हाइड्रोलिक तथा स्ट्रेक्च रल मैकेनिक्सस अध्यहयन, नियंत्रण एवं सेफ्टी रॉड ड्राइव मैकेनिज्म जैसे उपस्कतरों का विकास तथा सोडियम जल प्रतिक्रिया परीक्षण सुविधा जैसी विभिन्नम परीक्षण सुविधाएं एवं स्टी म जेनेरेटर परीक्षण सुविधा उपलब्ध् कराना शामिल है।

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: 09-02-2011