विज्ञान और प्रौद्योगिकी
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नाभिकीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम-तृतीय चरण

थोरियम आधारित रिएक्ट्र

सतत आधार पर ऊर्जा सुरक्षा देने के लिए भारतीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का दीर्घावधि केंद्रीय उद्देश्य थोरियम का इस्ते माल है। भारतीय कार्यक्रम का तीसरा चरण इस कारण थोरियम-यूरेनियम 233 चक्र पर आधारित है। इस दिशा में एक छोटी शुरूआत के तौर पर सीमित रूप से थोरियम का अनुसंधान रिएक्ट रों और दाबित गुरुजल रिएक्टसरों में इस्तेकमाल किया गया है।

अनुसंधान रिएक्ट र, कामिनी विभिन्नस पदार्थो की न्यूणट्रान रेडियोग्राफी के लिए 30 किलोवाट का सीमित विद्युत उत्पान्नक करता है और कलपक्कथम स्थित इस रिएक्टडर में थोरियम से हासिल किए गए यूरेनियम-233 ईंधन का इस्तेटमाल होता है। इस ईंधन का देश में ही उत्पािदन, पुनर्प्रसंस्कमरण और संविचरण किया जाता है।

बार्क 300 मेगावाट वाले उन्नित गुरुजल रिएक्टसर का विकास कर रहा है। यहां के अनुसंधान और विकास प्रयासों का उद्देश्या थोरियम के इस्तेकमाल में महारत हासिल करना और सुरक्षा के उन्नित तरीकों का प्रदर्शन करना है।

इसकी संरचना थोरियम से लगभग 75 फीसदी विद्युत उत्पा्दन के अनुकूल है। विश्वल में अपनी तरह का एकमात्र होने के कारण ए.एच.डब्‍ल्यू.आर. की संरचना लगातार वैज्ञानिकों की नजर में रहती है ताकि यह अनुकूलतम और सर्वमान्यि बन सके। ए.एच.डब्‍ल्यू.आर. में इस्तेमाल के लिए मिश्रित थोरियम-यूरेनियम और थोरियम-प्लूआटोनियम विकल्पों पर विचार हो रहा है। पारंपरिक पाउडर धातुविज्ञान के तरीकों से ईंधन के पैलेटों का सफलतापूर्वक संविचरण किया गया है। इस रिएक्ट र में अनेक उन्न त सुरक्षा विशेषताएं हैं। मुख्यच विन्या स सहित सम्पूगर्ण भौतिक डिजाइन बनाने का कार्य पूरा हो चुका है। एएचडब्यूरण कआर से जुड़ी भौतिक गणनाओं के वैधीकरण के लिए बार्क में महत्व पूर्ण सुविधा स्थाेपित की जा रही है।

मुख्य्त: प्रक्रिया ऊष्मा तथा नॉन-ग्रिड आधारित विद्युत उत्पा्दन प्रयोगों के लिए हाइड्रोजन उत्पा्दन हेतु सघन उच्च् ताप रिएक्टिर, परमाणु विद्युत पैक तथा उच्चो ताप रिएक्टरर सहित एक उच्चक ताप रिएक्ट र प्रणाली के विकास और डिजाइन बनाने का कार्य भी ट्रांबे में चल रहा है।

दूरदराज के क्षेत्रों में विद्युत उत्पारदन वैकल्पिक परिवहन ईधन जैसे हाइड्रोजन और निम्न स्तार के कोयला और तैलीय पदार्थो के पुन: संशोधन से जीवाष्मज तरल ईंधन प्राप्त0 करने के लिए एक कॉम्पेक्ट हाइ टेंप्रेचर रिएक्ट:र का विकास बार्क द्वारा किया जा रहा है। इसकी क्षमता 100 किलोवॉट होगी।

थोरियम से यूरेनियम-233 विखण्डित पदार्थ को बनाने के लिए नाभिकीय रिएक्टों के लिए एक्सीमलरेटर ड्रिवन सब-क्रिटिकल प्रणाली (ए.डी.एस.) भारतीय परमाणु कार्यक्रम की नवीनतम उपलब्धि है। थोरियम के बड़े पैमाने पर उपयोग के लिए एडीएस एक मजबूत प्रौद्योगिक आधार प्रदान कर सकता है। इस प्रविधि में लंबी जीवन अवपधि के एक्टीमनाइड्स और विखंडनीय उत्पा दों को पूरी तरह जलाया जा सकेगा एवं दीर्घ जीवन अवधि वाली उच्चं स्तंरीय रेडियो एक्टिव अपशिष्टव सामग्री के भंडारण में आने वाली तकनीकी समस्यायओं को कम किया जा सकेगा। इस प्रणाली के सफल विकास के लिए प्रोटोन इंजेक्ट र का विकास परमाणु ऊर्जा विभाग ने शुरू किया है। सब-क्रिटिकल एसेम्बटली पर प्रयोगात्मकक अध्यपयन करने के लिए एक 14 एम ई वी न्यू-ट्रान जेनरेटर को ज्या दा करंट आयन स्रोत के साथ उन्न त किया गया है।

यूरेनियम-233 को विकिरित थोरियम ईधन से संयंत्र द्वारा अलग करने के लिए यूरेनियम- थोरियम पृथक्कतरण सुविधा ट्रांबे में उपलब्ध है।

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: 09-02-2011