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बंदरगाह

भारत के तटवर्ती इलाकों में 12 बड़े बंदरगाह और 200 छोटे बंदरगाह हैं। बड़े बंदरगाह केंद्र सरकार और छोटे बंदरगाह राज्‍य सरकारों के अंतर्गत आते हैं।

देश में स्‍थित 12 बड़े बंदरगाह (भारतीय कंपनी अधिनियम 1956 के अधीन पोर्ट ऑफ एन्‍नोर सहित) पूर्वी और पश्‍चिमी तटों पर समान रूप से बनाए गए हैं। कोलकाता, पारादीप, विशाखापत्तनम, चेन्‍नई, एन्‍नोर और तूतीकोरिन बंदरगाह भारत के पूर्वी तट पर स्‍थित हैं, जबकि कोचीन, न्‍यू मंगलौर, मोरमुगाओ, मुंबई, न्हावाशेवा पर जवाहरलाल नेहरू और कांडला बंदरगाह पश्‍चिमी तट पर स्‍थित हैं।

बड़े बंदरगाहों की क्षमता 1951 में 20 मिलियन टन प्रतिवर्ष से बढ़कर 31 मार्च, 2007 तक 504.75 मिलियन टन प्रतिवर्ष हो गई है। दसवीं पंचवर्षीय योजना के शुरू में बंदरगाहों की क्षमता 343.45 मिलियन टन प्रतिवर्ष थी। जो दसवीं योजना के अंत तक (31 मार्च, 2007 तक) बढ़कर 504.75 मिलियन टन प्रतिवर्ष तक पहुंच गई। इस अवधि में 160.80 मिलियन टन प्रतिवर्ष की अतिरिक्‍त क्षमता की उपलब्‍धि रही। दसवीं योजना के सभी वर्षों में इन बड़े बंदरगाहों में ट्रैफिक की आवाजाही में भी वृद्धि हुई। वर्ष 2006-07 में छोटे बंदरगाहों में 185.54 मिलियन टन और 2006-07 के अंत तक यह बढ़कर 228 मिलियन टन प्रतिवर्ष हो गई।

दसवीं पंचवर्षीय योजना के प्रारंभ में बड़े बंदरगाहों में आने वाले जहाजों से 313.55 मिलियन टन क्षमता बढ़कर वर्ष 2007-08 में 519.67 मिलियन टन हो गई जिसमें 73.48 मिलियन कंटेनर ट्रैफिक था। बड़े बंदरगाहों में कंटेनर ट्रैफिक 2005-06 के 61.98 मिलियन से बढ़कर 2007-08 में 78.87 मिलियन टन हो गया।

बंदरगाहों के कुशल संचालन, उत्‍पादकता बढ़ाने और सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ-साथ बंदरगाहों में प्रतिस्‍पर्धा लाने के उद्देश्‍य से इसे क्षेत्र में निजी भागीदारी को भी स्‍वीकृति दे दी गई है। बड़े बंदरगाह ट्रस्‍ट अधिनियम 1953 के अंतर्गत प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश को बड़े बंदरगाहों में शत-प्रतिशत तक की भागीदारी की अनुमति दे दी गई है जिसमें बंदरगाहों और पत्तन स्‍थलों का निर्माण और रखरखाव किया जा सकेगा। बंदरगाह सेवाओं में टर्मिनलों/बर्थों के निर्माण और संचालन, भंडार ग्रहों और भंडारण सुविधाओं, ड्राई डॉकिंग तथा जहाजों के निर्माण में भी निजी क्षेत्र की भागीदारी रहेगी।

अब तक 4927 करोड़ रुपए के निवेश वाली 17 निजी क्षेत्र की परियोजनाएं संचालित की गई हैं जिसमें 99.30 मिलियन टन प्रतिवर्ष अतिरिक्‍त क्षमता शामिल है। 5181 करोड़ रुपए के निवेश वाली 8 परियोजनाओं का कार्यान्‍वयन और मूल्‍यांकन किया जा रहा है।

स्रोत: राष्‍ट्रीय पोर्टल विषयवस्‍तु प्रबंधन दल, द्वारा समीक्षित: 15-02-2011